علي خط النار

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विचारों:

659

भाषा:

अरबी

रेटिंग:

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विभाग:

निबंध

पृष्ठों की संख्या:

75

फ़ाइल का आकार:

1782373 MB

किताब की गुणवत्ता :

अच्छा

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34

अधिसूचना

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(दिसंबर 27, 1921 - 31 अक्टूबर, 2009), मिस्र के दार्शनिक, चिकित्सक और लेखक। वह रईसों से मुस्तफा कमाल महमूद हुसैन अल महफौज है, और उसका वंश अली ज़ैन अल-अबिदीन के साथ समाप्त होता है। उनके पिता की मृत्यु 1939 में पक्षाघात के वर्षों के बाद हुई थी। उन्होंने चिकित्सा का अध्ययन किया और 1953 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की, छाती की बीमारियों में विशेषज्ञता हासिल की, लेकिन 1960 में खुद को लेखन और शोध के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने 1961 में शादी की और शादी 1973 में तलाक में समाप्त हो गई। उनके दो बेटे थे , अमल और आदम। उन्होंने 1983 में श्रीमती ज़ैनब हमदी से पुनर्विवाह किया और यह विवाह भी 1987 में तलाक में समाप्त हो गया। उन्होंने कहानियों, नाटकों और यात्रा कहानियों के अलावा वैज्ञानिक, धार्मिक, दार्शनिक, सामाजिक और राजनीतिक पुस्तकों सहित 89 पुस्तकें लिखी हैं। उनकी शैली गुरुत्वाकर्षण, गहराई और सादगी की विशेषता है। डॉ मुस्तफा महमूद ने अपने प्रसिद्ध टीवी कार्यक्रम (विज्ञान और विश्वास) के 400 से अधिक एपिसोड प्रस्तुत किए, और 1979 में उन्होंने काहिरा में अपनी मस्जिद की स्थापना की जिसे "मुस्तफा महमूद मस्जिद" के रूप में जाना जाता है। इसमें सीमित आय वाले लोगों के इलाज से संबंधित तीन चिकित्सा केंद्र हैं, और मिस्र के कई लोग इसकी चिकित्सा प्रतिष्ठा के कारण इसके पास जाते हैं, और इसने सोलह डॉक्टरों से दया के काफिले का गठन किया है। केंद्र में चार खगोलीय वेधशालाएं शामिल हैं, और एक भूविज्ञान संग्रहालय, जिस पर विशेष प्रोफेसर आधारित हैं। संग्रहालय में ग्रेनाइट चट्टानों का एक समूह, विभिन्न आकृतियों में ममीकृत तितलियों और कुछ समुद्री जीव शामिल हैं। मस्जिद का सही नाम "महमूद" है और उन्होंने इसका नाम अपने पिता के नाम पर रखा।

पुस्तक का विवरण

علي خط النار पुस्तक पीडीएफ को पढ़ें और डाउनलोड करें मुस्तफा महमूद

هذا الكتاب هو همسة في أذن : 1. الحكومات العربية التي يجب ان تتحد وتتماسك ويتحابوا ويتعاونوا ويتعاملوا كذراع واحدة مع هذا المشروع الصهيوني الامريكي التفكيكي للقضاء عليهم وتفريقهم والسيطرة على مقدراتهم. وافقارهم واغراقهم في الفتن والخلافات والديون, والاخذ بالعبرة حرب الخليج واستدراج صدام الى غزو الكويت لخلق ذريعة للسيطرة على البترول وضرب الوحدة العربية في مقتل. 2. الشعوب العربية في الشارع التي قاطعت حينها (ويجب ان تستمر) الكوكاكولا والماكدونالد والكنتاكي والهمبورجر والتي فعلت هذا بأسلوب فطري باعتبارها رموزا أمريكية. فهي انتفاضة تلقائية ضد ما أحب وما تعود, وإشعار صادق بأنه يمكن أن يخلع ما تعود عليه وان يقاطع ما يألفه لانه ارتبط في ذهنه باشياء يكرهها. والحذر ثم الحذر من هذه الموجة القادمة من اوروبا وامريكا من فنون الانحلال والاثارة والعنف والشذوذ التي تبثها فضائيات الغرب وافلامه وصحفه ومجلاته وروايته والتي اصبحت في كل بيت عربي وان من يقف في كواليس هذه الوسائل هم الصهاينة أنفسهم. ولا يحدث هذا مصادفة بل هو ترويج متعمد وإغراق له سماسرته ووكالاته.فالنقل والتقليد عن هؤلاء الناس قد انحدر بنا الى غور سحيق من فقدان الهوية وفقدان الروح وفقدان الشخصية وفقدان المستقبل. ان البضاعة الفكرية فاسدة والاطعمة مسموومة والذين يقوممون بتسويقها علينا هم اعداؤنا لا اصدقاؤنا. وسموم الفكر أخطر فهي تسمم العقول وتعمي الابصار. والتضليل الاعلامي أفدح في آثاره يحول الارض الآمنة ال حقول ألغام، وعلينا ان نضع مرشحات على عقولنا وفلاتر على آذاننا وفلاتر على عيوننا.علينا ان نقرأ ما ينشر علينا بعقل ناقد ونبصر ما يعرض غلينا بعيون ناقدة ونتفهم ما يقال لنا برؤية نافذة.فلا شيء بريء في هذا الزمان.وإنما هي فخاخ ومصائد وفرق مقاتلة.كل فرقة تروج لمصلحتها وتروج لمذهبها. 3. أمريكا واسرائيل الذين لا يدرون الى أي هوة سوف يقودهم بطشهم الاعمى, وهم مشغولون وفي دوار العظمة لا يحفلون بكتب التاريخ التي تلقي علينا بالدروس كيف ان العلو ليس بعده الا القاع وكم من أمم وحكومات تجبرت وعلت وهي الان في قاع البحر وامم في بطن الرمال وامم تحت الجليد وامم غبرت وطواها النسيان ولم يبق لها أثر ولا ذكرى. . . ينسون عجلة الزمن التي تجري ويغفلون عن الحاضر الذي سوف يصبح ذكرى باهتة ثم يصبح سطرا في الماضي ثم يغدو نسيا منسيا. وغرور القوة التي استعارته اسرائيل من الظهير الامريكي سيكون قبرها .وتابوته

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