أنا والقرآن - محاولة فهم

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भाषा:

अरबी

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विभाग:

धर्मों

पृष्ठों की संख्या:

259

खंड:

इसलाम

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4373720 MB

किताब की गुणवत्ता :

अच्छा

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34

अधिसूचना

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- लीडर्स टूल्स सीरीज़ के मालिक (जिससे लेखक द्वारा अब तक छह पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं): जागरण से लेकर सतर्कता तक की एक पुस्तक, इतिहास के पुनर्जागरण दर्शन के कानून ऐतिहासिक स्मृति राजनीतिक अभ्यास के रणनीतिक सोच नियम नेतृत्व विकास कार्यक्रम का सामान्य ढांचा लीडर्स टूल्स मेथडोलॉजी के साथ। - प्रशिक्षण और विकास के लिए विशेषज्ञता के सदन के निदेशक मंडल के अध्यक्ष। - विकास अध्ययन और परामर्श के लिए तनमिया के निदेशक मंडल के अध्यक्ष - रणनीतिक योजना और रणनीतिक प्रबंधन में विशेषज्ञ। - एक से अधिक अरब देशों में कई संस्थानों के लिए रणनीतिक योजना और कैडरों के प्रशिक्षण का निरीक्षण किया। - अल-नाहदा वेबसाइट के जनरल सुपरवाइजर।

पुस्तक का विवरण

أنا والقرآن - محاولة فهم पुस्तक पीडीएफ को पढ़ें और डाउनलोड करें जसीम मोहम्मद सुल्तान

محاولة فهم لإزاحة أفهام العصور من المشهد وترك النص يتحدث عن ذاته مع القارئ، فلطالما قرأنا القرآن بعيون مسافر آخر (المفسر)، والذي ربما لم يسافر الرحلة بل نقلها من مسافر سابق له، هكذا مع النقل والنقل تتوارى الرسالة الحقيقية وتغيب الصورة ويبقى السؤال الكبير ماذا يحتاج من يريد ان يقوم برحلته الخاصة من خبرات من سبقه في السفر؟ أقول قد يحتاج لمعنى أو لفته أو تذكير ولكن ما دام هو المسافر فعليه أن ينظر بعيونه هو، ويرصد ما يقع أمامه من خبر ويطرح أسئلته على النّص وبذلك يعرف بقدر وسعه وطاقته مراد المرسل وروح الراسالة. إن سؤال المسافر هنا وهو شخص الكاتب: ماذا يقول القرآن للقارئ عبر الزمان والمكان من بعد انقضاء 1400 سنة على نزول الوحي؟ ما الذي يمكن أن يرد على عقله من أفكار النص؟ ما الذي يطرحه هو على النص من الأسئلة؟ تلك فكرة الكتاب وتلك روحه، أرد الدكتور جاسم أن أشارك القارئ معه في هذه الرحلة، ولكن لن يغنيه ذلك من أن تكون له في مرحلة ما من حيياته رحلته الخاصة مع القرآن المسافر هنا هو العقل والوجدان، والرحلة هي سير بين الآيات بمعناها الواسع، والغاية هي الوصول إلى الحقيقة القرآنية، والزاد هو ما جمعته عبر السنين من معرفة بالقرىن وبالحياة. كتاب سيتبعه العديد من الكتب يبدأ بسورتي الفاتحة والبقرة يحتوي ثلاث أبواب، الباب الثالث يحتوي ثلاث فصول ليس كتاب تفسير ولا كتاب سرد قصص وأحداث، وإنما هو محاولة غوص متواضعة في بحر أفكار القرآن الكبرى، ومحاولة تقريب للمهتمين.

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